3 Ayurvedic remedies पाचन की अग्नि को मजबूत बनाते हैं | अमलंत, डिजोमैप और त्रिफला
आयुर्वेद में ऐसा कहा गया है कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य का राज आपके Gut Health में छुपा है। gut या digestive system का मजबूत होना शरीर को रोगमुक्त रखने के लिए बेहद आवश्यक है। हमारे पाचन अग्नि की सेहत और शक्ति रोजमर्रा के हमारे दैनिक जीवन से विशेष तौर पर प्रभावित होते हैं। हम जिस प्रकार का और जिस तापमान का खाना खाते हैं इसका असर हमारे गट हेल्थ पर सीधे तौर से पड़ता है। ठंडा खाना, बासी खाना, प्रोसेस्ड फ़ूड और मीट आदि शरीर में अम्ल का निर्माण करते हैं। अम्ल हमारे शरीर में होने वाले अपच और टॉक्सिक पदार्थों के निर्माण का प्रमुख कारण बनता है। यह शरीर में नियमित रूप से गैस, acidity और कब्ज या constipation जैसी परेशानियों का कारण बनते हैं।
पाचन तंत्र से सम्बंधित इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए Maharishi Ayurveda आपके लिए लेकर आया है Digestive Care Therapy, यह पाचन तंत्र की समस्याओं का जड़ से समाधान करता है। इस प्रमुख प्रोडक्ट में विशेष रूप से तीन वेरिएंट होते हैं; अमलंत, डिजोमैप और त्रिफला। यह ख़ास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मेल से बना है जो पाचन अग्नि को मजबूत बनाने और गट हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का समाधान करता है। आइये इस ख़ास आयुर्वेदिक उत्पाद के कुछ प्रमुख विशेषताओं के बारे में विस्तार जानते हैं।
Digestive Care Therapy इसलिए है आपके Gut Health का साथी
Maharishi Ayurveda के इस ख़ास उत्पाद में आपको मिलता है त्रिफला, अमलंत और डिजोमैप टेबलेट का ख़ास कॉम्बो। पाचन से संबंधित किसी भी तरह की समस्या का जड़ से समाधान में यह विशेष रूप से फायदेमंद है। इस प्रोडक्ट के निर्माण में बेहद खास जड़ी-बूटियों का उपयोग किया गया है जो इसे खास बनाते हैं। आइये जानते हैं ये तीन कॉम्बो किस प्रकार से पाचन अग्नि को मजबूत बनाने में लाभकारी है।
अमलंत : यह एसिडिटी की समस्या को दूर कर उसे वापस आने से रोकने में सक्षम है। यह पेट के ph को बैलेंस रखता है और पाचन से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न नहीं होने देता। अमलंत टैबलेट का निर्माण चार खास जड़ी-बूटियों के मेल से किया गया है।
- आंवला और मेथी : यह खासतौर से तीनों दोष उडाना, समाना वात और क्लेदक कफ को नियंत्रित करता है और पेट में अम्ल या एसिड बनने से रोकता है।
- सुंथी : यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी पेट में गैस्ट्रिक के समाधान में बेहद मददगार है। यह gastric enzyme के तौर पर काम करता है और गैस की समस्या का निदान करने में काफी कारगर साबित होता है।
- हरीतकी : यह विशेष रूप से acidity की समस्या का समाधान करने में सहायक होता है। आयुर्वेद में इस हर्ब को विशेष रूप से पेट में अम्ल या एसिड के समाधान के लिए एक कारगर उपाय माना गया है।
- वेदांग : यह विशेष जड़ी-बूटी खासतौर से पाचन तंत्र से संबंधित समस्याओं के लिए विशेष उपयोगी माना जाता है।
त्रिफला : इसे आयुर्वेद में हर्बल लैक्सेटिव के नाम से भी जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है। यह बॉडी को detox करने और पेट साफ़ रखने में मददगार है। त्रिफला टैबलेट में विशेष रूप से तीन खास प्रकार की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है।
- आंवला : इसे आयुर्वेद में पाचन शक्ति को बढ़ावा देने वाले हर्ब के रूप में जाना जाता है।
- विभीतकी : यह शरीर से टॉक्सिन पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार होता है।
- हरीतकी : यह पेट में एसिड की समस्या को दूर करने और एक हेल्दी गट मेंटेन रखने में काफी फायदेमंद होता है।
डिजोमैप : यह पाचन तंत्र के प्रमुख दोषों समाना, अपना वात, और पाचक पित्त को नियंत्रित रखने का काम करता है। इसके साथ ही यह टैबलेट विशेष रूप से पाचन तंत्र को नियंत्रित रखता है। इसके निर्माण में तीन प्रमुख जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है।
- सौंफ : भारतीय संस्कृति में खाना खाने के बाद सौंफ खाने का प्रचलन काफी लंबे समय से चलता आ रहा है। आयुर्वेद में सौंफ को पाचन क्रिया संतुलित रखने में मददगार माना गया है।
- सौंठ : सौंठ या ड्राई जिंजर का उपयोग भी पाचन क्रिया को बैलेंस रखने के लिए किया जाता है।
- हरड़ : आयुर्वेद में इस विशेष जड़ी-बूटी को पेट में भोजन अवशोषित करने और पाचन क्रिया को सुचारु बनाने के लिए उपयोगी माना जाता है।
Maharishi Ayurveda के इस Digestive Care Therapy को विशेष रूप से पाचन अग्नि को मजबूत कर शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए बनाया गया है। यह 100% आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के मेल से बना है जिससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। यह पाचन से संबंधित समस्याओं को जड़ से मिटाने और लंबे समय तक पाचन तंत्र को मजबूती देने में लाभकारी है। अनुभवी वैद्य और एक्सपर्ट की निगरानी में इस प्रोडक्ट का निर्माण आयुर्वेद में पाचन तंत्र के लिए बताए गए जरूरी स्टेप्स को फॉलो कर किया गया है।
Digestive Care Therapy का सेवन कैसे करें ?
DCT के एक डिब्बे में आपको त्रिफला, डिजोमैप और अमलंत की 60-60 टैबलेट मिलते हैं।
- अमलंत के दो टैबलेट को दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है।
- त्रिफला की 3-4 टैबलेट रोजाना खाना खाने के बाद एक ग्लास गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है।
- डिजोमैप की 1-2 गोलियां दिन में दो बार खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है।
विशेष लाभ के लिए वैद्य से संपर्क कर उचित सलाह के बाद DCT का उपयोग करना ख़ासा फायदेमंद हो सकता है।
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